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काश तुम जितना प्यार मैं तुमसे कर पाउ

काश तुम जितना प्यार मैं तुमसे कर पाउ हरदम प्यार के गीत तुम्हारे लिए गा पाउ लहरो की धुन सुनाई ही आज प्यार की खुद की धुन सूना पाउ दिया जलता है अँधेरा मिटाने के लिए कभी तुम्हारी जिंदगी का अँधेरा मैं मिटा पाउ रंगो से है तुम्हे लगाव बहोत जिंदगी में तुम्हारे पसंद के रंग भर पाउ समां बन जाता है आशियाना तुम्हारे होने से कभी ये समां मस्ताना मैं कर पाउ शब्दों में डूबा रहता हु में सदा कभी मेरे कविता ओ से तुम्हे खुश कर पाउ - धीरज (10-12-2016)

मित्र

आयुष्यात आनंदाचा येणारा पुर म्हणजे मित्र गाणं महंताना बिघडलेला सुर म्हणजे मित्र फड़फदत आकाशात उडणारा पक्षी भूर मित्र उदास मनाला प्रफुल्लित करणारा नूर म्हणजे मित्र कधी चंचल तर कधी स्तब्ध म्हणजे मित्र कधी स्वछंद तर कधी बंदिस्त म्हणजे मित्र खोटा नसतोच कधी तो जळजळत सत्य म्हणजे मित्र कधी कविता तर कधी कवितेतला शब्द म्हणजे मित्र - धीरज (10-12-2016)